अब एनआरआई भी ले सकते है एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी

0
226
346 Views


सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण में रुचि को बढ़ाने के लिए सरकार ने भारत की नागरिकता रखने वाले अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को विमानन कंपनी में 100 फीसदी की हिस्सेदारी सौंपने की अनुमति दे दी है।    एक छोटे से बदलाव से एयर इंडिया में विदेशी निवेश के नियमों को अन्य निजी विमानन कंपनियों के बराबर कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे विमानन कंपनी में निवेश आकर्षित करने के मौके में इजाफा होगा।

जावड़ेकर ने कहा, ‘भारतीय नागरिकता वाले अनिवासी भारतीयों को एयर इंडिया में निवेश करने की अनुमति होगी। इससे नए निवेशों को आकर्षित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। यात्रियों को अधिक से अधिक बेहतर सेवाएं मिलना जारी रहेगा और इससे कारोबारी परिदृश्य में भी सुधार आएगा।’ सरकार ने जनवरी में एयर इंडिया सहित उसकी सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस में अपनी समूची हिस्सेदारी बेचने के लिए अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए थे। इसमें एयर इंडिया और सिंगापुर एयरपोर्ट टर्मिनल सर्विसेज की संयुक्त उद्यम एयर इंडिया सैट्ïस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए भी अभिरुचि पत्र मंगाने का फैसला शामिल था।    

हालांकि, विमानन कंपनी में एनआरआई को 100 फीसदी निवेश करने की अनुमति का फैसला बहुलांश हिस्सेदारी रखने और पूर्ण निर्णय लेने की शक्ति का उल्लंघन भी नहीं होगा। एनआरआई निवेशों को घरेलू निवेशों के तौर पर देखा जाएगा।  बहुलांश हिस्सेदारी और पूर्ण निर्णय स्वामित्व (एसओईसी) ढांचे के तहत नियम है कि किसी खास देश से विदेशों के लिए उड़ान भरने वाले विमानन कंपनियों की बहुलांश हिस्सेदारी उस देश की सरकार या उसके नागरिकों के पास होनी चाहिए। विमानन उद्योग में इस नियम को पूरी दुनिया में अपनाया जाता है।   

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here