आईजीएसटी रिफंड को आसान बनाने के लिए उठाया कदम

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने निर्यातकों के लंबित आईजीएसटी रिफंड को लेकर कदम उठाया है। इसके तहत उन मामलों में निर्यातकों को लंबित आईजीएसटी (एकीकृत माल एवं सेवा कर) वापसी की मंजूरी के लिये समयसीमा बढ़ा दी है जहां जीएसटी रिटर्न में अंतर के कारण सीमा शुल्क विभाग को रिकॉर्ड नहीं भेजे गये हैं।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि इससे रिफंड रुकावट की समस्या को दूर करने में मदद मिलेगी। यह निर्यातकों द्वारा हलफनामा/सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) प्रमाण पत्र जमा करने और रिफंड के बाद ऑडिट जांच पर निर्भर करेगा। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, सीबीआईसी ने लंबित आईजीएसटी वापसी की मंजूरी के लिये समयसीमा बढ़ा दी है। यह उन मामलों के लिये है जहां, जीएसटीआर1 और जीएसटीआर3 बी में अंतर के कारण रिकार्ड आईसीईजीएटीई (इंडिया कस्टम इलेक्ट्रॉनिक कामर्स गेटवे) को नहीं भेजा गया है। बयान के अनुसार यह सुविधा उन सभी शिपिंग बिल के लिए होगी जो 31 मार्च तक भरे गये हैं। सीबीआईसी ने स्थायी आधार पर सीमा शुल्क अधिकारी के जरिये बिलों में अंतर को दूर करने की सुविधा भी बढ़ा दी है। पूर्व में, यह सुविधा सीमित अवधि के लिए थी। यानी जो ‘शिपिंग बिल 31 दिसंबर, 2019 तक जमा किये गये थे, उन्हीं मामलों में यह सुविधा दी गयी थी।

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