आदिवासी जीवन शैली पर आधारित है पत्रिका मोरगांचल

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रायगढ़: विश्व आदिवासी दिवस पर अदाणी फाउंडेशन द्वारा आयोजित वेबीनार में मोरगांचल नामक पत्रिका का विमोचन किया गया। पत्रिका का ऑनलाइन विमोचन वेबिनार में उपस्थित वक्ताओं द्वारा किया गया। पत्रिका में स्थानीय लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार की जानकारियां, आलेख, कविताएं, आदिवासी जीवनशैली से संबंधित बातें तथा उनकी धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तृत वर्णन किया गया है। साथ ही इस वेबिनार के माध्यम से वक्ताओं ने 88 ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, आदिवासी समाज की जीवन शैली व रहन सहन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों पर भी चर्चा की। 
इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में क्षेत्रीय विधायक श्री चक्रधर सिंह सिदार, श्री सत्यानंद राठिया पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, श्री वनमाली प्रसाद नेटी, श्री उत्तर कुमार सिदार और श्रीमती विद्यावती सिदार ने लोगों को संबोधित किया और आदिवासियों के उत्थान तथा विकास के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए। कोरोना काल में सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय वक्ताओं को आमंत्रित किया गया था ताकि वह क्षेत्र की जनता को बेहतर तरीके से सारी बात समझा सकें। कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने आदिवासी समाज की जीवन शैली, रहन-सहन, खान-पान, वेशभूषा, तीज त्यौहार आदि पर सम्पूर्ण चर्चा की। इस दौरान धार्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक मान्यताओं की बातें भी बताई गई। 
अदाणी फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित ‘मोरगांचल’ नामक स्मारिका, मोरंगांचल क्षेत्र और उसके आसपास रहने वाले आदिवासी समुदाय के बारे में गहराई से विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करती है। यह स्मारिका हम में से कई लोगों को आदिवासी समुदाय की उत्पत्ति, संस्कृति, विरासत, प्रतिभा के साथ ही उनसे जुड़ी ढेर सारी अन्य बातें जानने में मदद करेगी। यह स्मारिका हमें बेहतर तरीके से उनकी सेवा करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने में अनिवार्य रूप से सहायक रहेगी।
इस वेबिनार के दौरान मेहमानों ने यह भी बताया कि कैसे सदियों से मोरगांचल क्षेत्र में निवासरत उनके पुरखों ने इस क्षेत्र की परम्परा, मान्यताओं को सहेज कर रखा है। साथ ही सभी अतिथियों ने अदाणी फाउंडेशन द्वारा विगत वर्षों से किए जा रहे विश्व आदिवासी दिवस आयोजन की भरपूर सराहना की और शुभकामनाएं दी। वहीं फाउंडेशन का भी मानना है कि भविष्य के सालों में आदिवासी समुदाय के लिए अनेकों कार्य करने की योजना है और आदिवासी समाज के विकास तथा उनके हितों के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगी। 
गौरतलब है कि भारतीय आदिवासी लोक कला और संस्कृति सिर्फ हमारे देश की ही नहीं, परन्‍तु विश्‍व की अमूल्‍य विरासत है। प्राचीन काल से ही भारत के आदिवासी और ग्रामीण लोग विविध कला और सांस्कृतिक रूपों का सृजन करते रहे हैं और उन्होंने अपनी रचनात्मक भव्यता को प्रकट करना जारी रखा है। आदिवासी संस्‍कृति विश्‍व के कई प्रदेशों में पायी जाती है। कई राज्यों की तरह, छत्तीसगढ़ में भी आदिवासी संस्कृति अपने अद्वितीय तौर-तरीकों और साधनों के साथ काफी विशाल और विविधताओं से परिपूर्ण है।

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