गुजरात में नो रिपीट फार्म्यूले से अटकीं दिग्गजों की सांसें, इन नामों की चर्चा

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गुजरात में नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भले ही शपथ ले ली हो, मगर अब तक उनकी कैबिनेट की तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पाई है। गुजरात में ‘नो रिपीट फॉर्मूला’ की वजह से कई विधायकों-मंत्रियों की सांसें अटकी हैं। इस बीच भूपेंद्र पटेल सरकार के नए मंत्री आज यानी गुरुवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। माना जा रहा है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल कर सकती है। खबरें तो यह भी है कि करीब भूपेंद्र पटेल के कैबिनेट में 90 फीसदी नए चेहरे होंगे। 

मंत्रियों के नाम पर सस्पेंस कायम

भाजपा ने अब तक मंत्रियों के नामों का ऐलान नहीं किया है। हालांकि, बताया जा रहा है कि करीब 27 मंत्री आज शपथ लेंगे। भाजपा के ‘नो रिपीट’ फॉर्मूले की पृष्ठभूमि में मंत्री पद के चेहरों पर सस्पेंस बना हुआ है, जिनके नामों की घोषणा अब तक नहीं हुई है। हालांकि, खबर है कि जिन्हें मंत्री बनाया जाएगा, उन्हें अब शपथ-ग्रहण समारोह के लिए फोन-कॉल्स आने शुरू हो गए हैं। पार्टी ने इससे पहले कहा था कि शपथ ग्रहण समारोह बुधवार को होगा। यहां तक कि राज भवन पर लगे पोस्टरों में शपथ ग्रहण समारोह में 15 सितंबर की तारीख लिखी हुई थी। मगर कैबिनेट में ज्यादातर नए चेहरे को शामिल करने को लेकर नाराजगी की खबरों के बीच शपथ समारोह को आज के लिए टाल दिया गया। हालांकि, न तो गुजरात सरकार और न ही भाजपा ने इसका कोई कारण बताया। 

बुधवार की शाम को मुख्यमंत्री कार्यालय ने घोषणा की कि राज्य की राजधानी गांधीनगर के राजभवन में गुरुवार दोपहर 1.30 बजे नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह होगा। अहमदाबाद से पहली बार विधायक बने भूपेंद्र पटेल (59) ने पिछले शनिवार को विजय रूपाणी के अचानक इस्तीफे के बाद सोमवार को गुजरात के नए मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला था। 

क्या है नो रिपीट फॉर्मूला

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व ने इस बार नए चेहरों को आजमाने का फैसला किया है और लगभग सभी पुराने मंत्रियों को भी हटा दिया है। यहां तक कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को भी टाटा-बाय बोल दिया गया है, जो पिछली रूपाणी सरकार का हिस्सा थे। हालांकि इस बारे में बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  कई लोगों का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ‘नो रिपीट’ फॉर्मूला प्रस्तावित किया गया है, क्योंकि गुजरात में दो दशकों से अधिक समय से सत्ता में रही भाजपा एक साफ स्लेट के साथ मतदाताओं के पास जाना चाहती है। 

क्या कलह है टालने की असली वजह

गुजरात बीजेपी में आंतरिक कलह की खबरों को प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने खारिज किया है। उन्होंने कहा, ‘कैबिनेट गठन को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। सब कुछ नियंत्रण में है।’ पाटिल ने यह अनुमान लगाने से भी इनकार कर दिया कि उपमुख्यमंत्री कौन होगा या फिर यह पद ही हट जाएगा। बता दें कि शक्तिशाली पाटीदार नेता नितिन पटेल विजय रूपाणी के डिप्टी थे।

राजभवन में हुआ था हंगामा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजभवन में बुधवार को कैबिनेट गठन का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था, क्योंकि बीजेपी के कुछ विधायकों के समर्थक वहां पहुंचे थे और उनके नेता के मंत्री नहीं बनने की जानकारी के बाद पोस्टर फाड़ दिए। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वे सभी लिंबडी विधायक कृतिसिंह राणा के समर्थक थे। रूपानी सरकार में मंत्री रहे एक विधायक ने कहा कि  जब उन्हें पता चला कि राज्यपाल के घर को भेजी गई सूची में उनका नाम नहीं है तो उऩ्होंने विरोध किया। नेता ने कहा कि हम सभी वरिष्ठ मंत्रियों को हटाया जा रहा है और इसलिए हमें विरोध की आवाज उठानी पड़ी।

पटेल ने कर दिया खेल

इधर, मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे पाटीदारों के सशक्त नेता नितिन पटेल अब खुद ही मंत्री नहीं बनना चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो पार्टी चाहती है कि वह भूपेंद्र पटेल की कैबिनेट में रहें, मगर वह खुद ही नए मुख्यमंत्री के अधीन होकर काम नहीं करना चाहते हैं। 

ये चेहरे हो सकते हैं शामिल: सी के राउलजी, निमिषा सुथार, अजमल ठाकोर, मनीषा वकील, पंकज देसाई, मुकेश पटेल, शशिकांत पंड्या, पंकज देसाई, नरेश पटेल, अरविंद पटेल, अर्जुन सिंह चौहान. हर्ष संघवी, बृजेश मेरजा, अरुण सिंह राणा, नरेश पटेल, अरविंद पटेल के मंत्री बनाए जाने की संभावना है।

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