गूगल और फेसबुक को संसदीय पैनल ने भेजा समन, मंगलवार को पेशी, मिसयूज और जनता के अधिकार पर होगी बात

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सोशल मीडिया के बेजा इस्तेमाल और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर चर्चा के लिए आईटी मामलों की संसदीय समिति ने फेसबुक और गूगल को समन जारी किया है। दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को मंगलवार को पैनल के समक्ष पेश होने को कहा गया है ताकि इन मुद्दों पर चर्चा की जा सके। इन दोनों दिग्गज टेक कंपनियों को नए आईटी नियमों को लेकर ट्विटर के अधिकारियों से बातचीत के 10 दिन बाद समन जारी किया गया है। इस मीटिंग के दौरान यूजर्स की ओर से प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाने वाली सामग्री और भारत में लागू कानूनों को लागू करने को लेकर बात की जाएगी। इससे पहले ट्विटर की टीम ने संसदीय समिति से कहा था कि वह अपनी नीतियों का ही पालन करता है।

इस मीटिंग के दौरान संसदीय समिति ने ट्विटर को बताया था कि भारत कानून सर्वोच्च है और उसे यहां उसके मुताबिक ही काम करना होगा। यह मीटिंग भी ऐसे वक्त में होने वाली है, जब केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच नए आईटी नियमों को लेकर छिड़ा विवाद खत्म नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने ट्विटर से कहा है कि उसे भारत के उन नियमों का पालन करना ही होगा, जिन्हें लोगों की रक्षा के मकसद से लागू किया गया है। यही नहीं इसी विवाद के बीच शुक्रवार को ट्विटर ने एक घंटे के लिए देश के आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद के ही अकाउंट को ब्लॉक कर दिया था। हालांकि बाद में सफाई में कहा गया था कि कॉपीराइट के नियमों के उल्लंघन के चलते ऐसी कार्रवाई हुई है। 

भारत में 26 मई से नए आईटी नियमों को लागू किया गया है। इन्हें फॉलो न करने के चलते ट्विटर से पहले भी भारत में मिल रही लीगल इम्युनिटी को वापस ले लिया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि ट्विटर पर यह नहीं कह सकता कि वह सिर्फ एक प्लेटफॉर्म है। अब उसके मंच पर शेयर होने वाले किसी भी कॉन्टेंट के लिए उसे जिम्मेदार माना जाएगा। यहीं पुलिस और प्रशासन को उसके खिलाफ कार्रवाई करने का भी अधिकार होगा। हाल ही में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, आरएसएस चीफ मोहन भागवत समेत कई लोगों के अकाउंट से ब्लू टिक हटाए जाने के चलते भी ट्विटर विवादों में आ गया था। हालांकि इन अकाउंट्स के ब्लू बैज को कुछ देर में ही फिर से बहाल कर दिया गया।

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