छह में चार सीटों पर सवर्ण होंगे बसपा प्रत्याशी, सात नवंबर को करेंगी उम्मीवाद का ऐलान

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देश की तीन लोकसभा सीटों और 13 राज्यों की 29 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को निश्चित तौर पर चौंकाया होगा। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से अब तक ब्रांड मोदी के नाम पर चुनाव लड़ती आई भारतीय जनता पार्टी को ये नतीजे इस बात पर अब सोचने को मजबूर करेंगे कि आखिर अकेले मोदी फैक्टर से भगवा पार्टी कब तक राज्यों में जीतती रहेगी, क्या ब्रांड मोदी के अलावा अब राज्यों में मजबूत लीडरशिप पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र से लेकर असम और मध्य प्रदेश तक में जिस तरह से नतीजे देखने को मिले, उसने यह इशारा कर दिया है कि अगर भाजपा राज्यों में लीडरशिप को मजबूत करने पर ध्यान नहीं देती है तो फिर मोदी फैक्टर ज्यादा दिनों तक उसे सत्ता की कुर्सी पर नहीं बैठा सकती। 

दरअसल, हाल ही में हुए उपचुनाव में बीजेपी गठबंधन को 29 में 15 सीटों पर जीत हासिल हुई है, जबकि कांग्रेस के खाते में 8 सीटें गई हैं। वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने बंगाल में भाजपा को चारों खाने चित कर दिया है और बंगाल की सभी 4 सीटों पर जीत हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी के लिए राहत की बात यह रही कि हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में असम में पार्टी ने सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की है और शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा को मध्य प्रदेश की 2 सीटों पर जीत हासिल हुई है। लेकिन भाजपा को सबसे करारी हार तो हिमाचल प्रदेश में मिली, जहां जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भगवा पार्टी की सरकार भी है। कांग्रेस को हिमाचल की तीन सीटों पर जीत हासिल हुई है।

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