टेलीकॉम कंपनियों को AGR देनदारी चुकाने के लिए SC ने दिया 10 साल का वक्त

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कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) एजीआर (AGR) बकाये के मामले में दूरसंचार कंपनियों को बड़ी राहत दी है. शीर्ष न्यायालय ने टेलीकॉम कंपनियों को AGR देनदारी चुकाने के लिए 10 साल का वक्त दिया है. वित्तीय संकट का सामना कर रही दूरसंचार कंपनियों के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि 31 मार्च 2021 तक टेलीकॉम कंपनियां अपने कुल बकाया का 10 फीसदी चुकाएंगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कोरोना के चलते ये समय बढ़ा रहे हैं. AGR बकाया चुकाने के लिए दस साल का समय दिया जा रही है. 

कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) को ये फैसला करने को कहा है कि दिवालापन (Insolvency) की प्रक्रिया के दौरान क्या स्पैक्ट्रम बेचा जा सकता है?

सुप्रीम कोर्ट को तीन पहलुओं पर फैसला सुनाना था 
1)- केंद्र की याचिका जिसमें AGR के भुगतान के लिए 20 साल देने की मांग की गई. भारती एयरटेल और वोडा-आइडिया ने 15 साल में भुगतान की इजाजत मांगी है. 2)- क्या स्पेक्ट्रम (या स्पेक्ट्रम का उपयोग करने का अधिकार) IBC के तहत हस्तांतरित, सौंपा या बेचा जा सकता है. 3)- आर कॉम का स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने पर जियो और वीडियोकॉन और एयरसेल का स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने पर एयरटेल उनकी देयता के आधार पर अतिरिक्त देयता के तहत आएंगे.  

कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
टेलीकॉम कंपनियों को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) जमा करने को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को केंद्र की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह टेलीकॉम कंपनियों को बकाया राशि की फिर से गणना करने की अनुमति नहीं देगा. कोर्ट ने दूरसंचार विभाग (DoT) को आरकॉम, सिस्तेमा श्याम टेलीसर्विसेज, वीडियोकॉन से संबंधित दिवालापन प्रक्रिया पर 7 दिनों के भीतर ब्योरा देने को कहा था. 

दूरसंचार कंपनियों की एजीआर देनदारी
दूरसंचार विभाग ने मांग की थी कि सुप्रीम कोर्ट 20 साल में बकाया राशि वसूलने की अनुमति दे. दूरसंचार कंपनियों द्वारा बकाया के बारे में विभाग ने शीर्ष अदालत को सूचित किया है. एयरटेल ने 18,004 करोड़ का भुगतान किया है, बकाया राशि लगभग 25,976 करोड़ है. वहीं वोडाफोन-आइडिया ने 7854 करोड़ का भुगतान किया, शेष राशि लगभग 50399 करोड़ है. टाटा टेलीकॉम ने 4197 करोड भुगतान किया, उसपर शेष 12601 करोड़ है.

SC ने पूछा था सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, हमें लंबित बकाए पर बेईमानी से व्यवहार करने वाले टेलीकॉम को राहत क्यों देनी चाहिए? वोडाफोन की तरफ से कोर्ट में पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा, ” पिछले 10 वर्षों में भारत के व्यवसायों में पूरे निवेश में घाटा हुआ है. वार्षिक राजस्व, आईटी रिटर्न का विवरण दाखिल किया गया है. 1 लाख करोड़ इक्विटी का सफाया हो चुका है.” – इस पर कोर्ट ने कहा, “क्या आपने आकस्मिक देयताओं के लिए वार्षिक खातों की व्यवस्था की है? रोहतगी ने जवाब दिया,  “हम TDSAT में सफल रहे इसलिए हमारे पास कोई प्रावधान नहीं था.” 

न्यायालय ने पूछा- कैसे करेंगे AGR का भुगतान
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दूरसंचार विभाग की मांग के बावजूद आपने AGR बकाया के लिए प्रावधान क्यों नहीं किया? वोडाफोन आइडिया के वकील ने कहा, “दंड और ब्याज राशि 50 हजार करोड़ को पार कर गई जबकि दूरसंचार विभाग की गणना के अनुसार 14 हजार करोड़ रुपये AGR बकाया था. हमने जो कुछ भी कमाया वह खर्चों में बह गया.” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “प्रश्न यह नहीं है कि यदि आप कुछ छिपा रहे हैं, सवाल तो यह है कि आप AGR बकाया का भुगतान कैसे करेंगे?” 

टेलीकॉम कंपनियों से मांगा गया 10 साल का बहीखाता
बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बकाया ना चुकाने वाली टेलीकॉम कंपनियों से 10 साल का बहीखाता मांगा था, साथ ही कंपनियों से यह भी कहा कि 10 साल में दिए गए टैक्स का ब्यौरा भी कोर्ट में दाखिल करें. देश की सबसे बड़ी अदालत ने केंद्र से कहा कि वो कंपनियों की भुगतान योजना पर विचार करे और कोर्ट को इस संबंध में जानकारी दे.सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान दूरसंचार एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो पैसा कमा रहा है, इसलिए उसे कुछ धनराशि जमा करनी होगी. क्योंकि सरकार को महामारी के इस दौर में पैसे की जरूरत है. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए बताया कि पीएसयू के खिलाफ एजीआर बकाया को वापस ले लिया गया है. यह भी कहा गया कि 4 लाख करोड़ रुपये का 96% बिल वापस ले लिया गया है. 

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