डिस्काॅम्स पर बकाया 1.199 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

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विभिन्न राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति खराब चल रही है। हालिया आॅडिट रिपोर्ट के मुताबिक डिस्काॅम्स का घाटा अनुमान से ज्यादा हो गया है। विद्युत मंत्रालय के पेमेंट रेटिफिकेशन एंड एनालिसिस पोर्टल (प्राप्ति) के आंकड़ों के मुताबिक, 65 डिस्काॅम्स पर 197 बिजली उत्पादक कंपनियों का 1.199 लाख करोड़ रुपया बकाया है, जो मई, 2020 से 5.33 प्रतिशत ज्यादा है। मार्च, 2020 के अंत में यह करीब 905.77 अरब रुपये था।
इस बकाए में सर्वाधिक 349.37 अरब रुपये का बकाया राजस्थान में है। 175.29 अरब रुपये के बकाए के साथ तमिलनाडु दूसरे नंबर है। इसमें से 149.11 अरब रुपये का बकाया 60 दिन से ज्यादा समय से है। उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर है, जहां बकाया 144.09 अरब रुपये है, जिसमें से 104.85 अरब रुपया 60 दिन से ज्यादा समय से बकाया है। (स्रोत: प्राप्ति पोर्टल)
दक्षिणी राज्यों में तमिलनाडु की स्थिति सबसे ज्यादा जटिल है। चिंताजनक बात यह है कि राज्य का बकाया महीने दर महीने बढ़ता जा रहा है और कहीं राहत मिलती नहीं दिख रही है। बिजली ऋण की स्थिति नियंत्रण से बाहर जाने के बावजूद राज्य में कई साल से टैरिफ में बदलाव नहीं किया गया है। तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन काॅरपोरेशन (टीएएनजीईडीसीओ) पर इंटरस्टेट इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स (आईपीपी) का 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। कुछ आईपीपी ने टीएएनजीईडीसीओ को पत्र लिखकर भुगतान नहीं होने की स्थिति में लेटर आॅफ क्रेडिट को भुनाने की बात कही है। विद्युत मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद पिछले साल जुलाई में ये लेटर आॅफ क्रेडिट जारी किए गए थे।
डिस्काॅम्स को इस समय कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें परिचालन दक्षता में कमी, अव्यावहारिक रूप से कम टैरिफ और बिजली की औद्योगिक मांग में कमी जैसी समस्याएं हैं, जिस कारण से बिजली आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने की इनकी क्षमता प्रभावित हो रही है और बिजली उत्पादक कंपनियों पर बड़ा वित्तीय दबाव पड़ रहा है।

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