ढांचागत क्षेत्र की 442 परियोजनाओं की लागत में 4.34 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि

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ढांचागत क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये मूल्य या उससे अधिक की 442 परियोजनाओं की लागत में 4.34 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कियान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में यह कहा गया है। मंत्रालय 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक ढांचागत परियोजनाओं पर नजर रखता है।

कुल 1,671 परियोजनाओं में से 442 की लागत में वद्धि हुई है।

मंत्रालय की नवंबर 2020 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘1,671 परियोजनाओं की कुल मूल लागत 21,21,383.82 करोड़ रुपये थी। अब इन परियोजनाओं को क्रियान्वित करने की लागत बढ़कर 25,55,957.52 करोड़ रुपये पहुंच गयी है। यह लागत में 4,34,573.70 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी (मूल लागत का 20.49 प्रतिशत) को बताता है।’’

इन परियोजनाओं पर कुल खर्च नवंबर 2020 तक 11,93,997.81 करोड़ रुपये था जो परियोजना की अनुमानित लागत का 46.71 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार हालांकि क्रियान्वयन में देरी वाली परियोजनाओं की संख्या घटकर 412 पर आ गयी है। इसमें विलम्ब का आकलन संबंधित परियोजनाओं को पूरा करने की नई समयसीमा के आधार पर की गयी है।

इसमें यह भी कहा गया है कि 942 परियोजनाओं के बारे में न तो उसे पूरा होने के वर्ष के बारे में जानकारी दी गयी है न ही कोई अस्थायी समयसीमा बतायी गयी है।

कुल विलम्बित 536 परियोजनाओं में से 120 में एक से 12 महीने की देरी हुई है जबकि 134 परियोजनाओं में 13 से 24 महीने, 162 परियोजनाओं में 25 से 60 महीने तथा 120 परियोजनाओं में 61 महीने और उससे अधिक की देरी हुई है।

इन 536 परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी औसतन 44.15 महीने है।

इन परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही एजेंसियों ने देरी का कारण जमीन अधिग्रहण में समस्या, वन एवं पर्यावरण मंजूरी हासिल करने में विलम्ब तथा संबंधित ढांचागत सविधाओं का अभाव होना बताया है।

रिपोर्ट के अनुसार इसके अलावा परियोजनाओं के लिये वित्त पोषण में विलम्ब, विस्तृत इंजीनियरिंग रूपरेखा को अंतिम रूप देने में देरी, निविदा, आर्डर और उपकरण आपूर्ति में विलम्ब, कानून व्यवस्था समेत अन्य समस्याएं हैं।

साथ ही कोविड-19 महामारी और उसकी रोकथाम के लिये देश भर में ‘लॉकडाउन’ लगाये जाने से भी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हुई है।

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