निवेश से पहले इन पांच तरीकों से पहचाने पोंजी स्कीम

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आए दिन कंपनियों द्वारा निवेशकों की जमा पूंजी लेकर रातों-रात गायब हो जाने की खबरे आती हैं। इसमें निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब चुके हैं। सरकार को इसके लिए सख्त कानून बनाना पड़ा है।

हालांकि, इसके बाद भी पोंजी स्कीम के तहत लोगों को ठगा जा रहा है। ऐसा इसलिए कि आम लोगों के लिए पोंजी स्कीमों की पहचान करना आसान नहीं है। इसका ऐसा कोई तय मानक नहीं है, जिसके आधार पर कोई पोंजी स्कीम की पहचान तुरंत कर ले। लेकिन किसी भी निवेश योजना में निवेश से पहले सावधानी के साथ पड़ताल करें तो आपके लिए इन फर्जी स्कीमों की पहचान कर पाना मुश्किल भी नहीं है।

1 ऊंचा रिटर्न खतरे का संकेत

रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक कोई भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) जमा पर 12.5 फीसदी सालाना से अधिक ब्याज नहीं दे सकती है। ऐसे में कोई कंपनी आपको इससे ऊंचा रिटर्न देने का झांसा दे रही है तो सावधान हो जाने की जरूरत है। पोंजी स्कीम चलाने वाली कंपनियां सामान्यत: छोटी अवधि में 15 फीसदी से अधिक रिटर्न देने का वादा करती हैं। शुरुआत में वह राशि देतीं हैं और बाद में बड़ी राशि जमा होने पर रातों-रात गायब हो जाती हैं।

2 निवेशक लाओ मोटा कमीशन पाओ

पोंजी स्कीम, पिरामिड स्कीम, मल्टी लेवल मार्केटिंग या नेटवर्क मार्केटिंग में केवल नाम का अंतर हो सकता है लेकिन यह एक तरह से सुनियोजित कॉरपोरेट ठगी का मॉडल है। इसमें पहले लोगों को पैसा लगाने का लुभावना ऑफर दिया जाता है। शुरुआती समय में उन्हें कुछ ब्याज या बोनस का भुगतान भी दिया जाता है। इसके बाद उन्हें एजेंट बनकर कमीशन से मोटी कमाई का लालच दिया जाता है। नए निवेशकों की राशि से पुरानों को कुछ समय तक भुगतान किया जाता है। लेकिन पुराने निवेशकों को भुगतान का बोझ बढ़ते ही सारी राशि लेकर भाग जाती है।

3 निवेश नहीं डूबने की गारंटी

बैंकिंग अधिनियम के अनुसार सरकार बैंकों में पांच लाख रुपये तक जमा की ही गारंटी लेती है। यह भी पहले एक लाख रुपये थी। इसके अलावा कोई ऐसा कारोबार नहीं है जिसमें नुकसान नहीं होने की को कोई गारंटी दे सके। ऐसे में कोई आपको एक तरह ऊंचे रिटर्न और दूसरी ओर निवेश के नहीं डूबने की गारंटी दे रहा है तो सावधान हो जाएं।

4 पंजीकरण पर गोलमोल जवाब

रिजर्व बैंक, बाजार नियामक सेबी, बीमा नियामक इरडा और कॉर्पोरेट मंत्रालय के तहत आने वाले कंपनी पंजीयक के यहां विभिन्न कंपनियों का पंजीकरण होता है। नियामक की मंजूरी के बाद ही कारोबार की अनुमति होती है। ऐसे में कोई दूसरी संस्था से या नियामकों के मिलते-जुलते नाम से पंजीकरण का दावा कर रहा हो तो संभल जाना ही बेहतर है।

5 पेंड़ और भेंड़-बकरी से कमाई

पोंजी स्कीम से जुड़ी ज्यादातर कंपनियां सीधे-सादे निवेशकों को फंसाने के लिए पेंड़ और भेंड़-बकरी से जुड़े कारोबार में होने का दावा करती हैं। वहीं कुछ सोने के खनन से जुड़े होने की बात कहती हैं। सस्ते में बंजर जमीन खरीदकर उसमें पेंड़ लगाने से एक-दो या पांच साल में कमाई दोगुना नहीं हो जाती है। भेंड़-बकरी से जुड़े कारोबार का भी यही हाल है चाहें महंगे ऊन या मांस निर्यात की बात क्यों न हो। सोने के खनन में नामचीन कंपनियां शामिल हैं और उसमें भारी निवेश की जरूरत होती है।

क्या है पोंजी स्कीम

इतालवी-अमेरिकी चार्ल्स पोंजी ने 1919 में अमेरिका के बोस्टन में निवेश योजना शुरू की थी। इसमें निवेशकों से वादा किया गया था कि सिर्फ 45 दिन में धन दोगुना हो जाएगा। हालांकि, इसके लिए कोई कारोबारी मॉडल नहीं था। स्कीम के तहत नए निवेशकों के धन से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था। जब नए निवेशकों का पैसा पुराने के लिए कम पड़ने लगा तब यह योजना धराशायी हो गई।

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