निर्भया रेप केस से सिंगापुर ने सबक लिया: अंतरराष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने भारतीय डॉक्टर ने 7 साल की बच्ची पर सफलतापूर्वक किया पहला आंतों का प्रत्यारोपण

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डॉ. गौरव चौबाल, डायरेक्‍टर- लिवर, पैनक्रियाज एंड इंटेस्टाइन ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी सर्जरी, ग्लोबल हॉस्पिटल, मुंबई के साथ सिंगापुर के केके वीमन्स एंड चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की टीम ने इस दुर्लभ सर्जरी को अंजाम दिया

पहली बार भारतीय डॉ. गौरव चौबाल, डायरेक्टर-लिवर,पैनक्रियाज एंड इंटेस्टाइन ट्रांसप्लांट्स एवं एचपीबी सर्जरी, ग्लोबल हॉस्पिटल ने 7 साल की रोगी पर सफलतापूर्वक पहला लिविंग डोनर इंटेस्टाइनल ट्रांसप्लांट किया। मरीज को जन्म से ही टर्मिनल सूडो ऑब्सट्रक्शन (यह मांसपेशियों में सिकुड़न की अक्षमता होती है) के साथ-साथ लिवर संबंधी काफी सारी समस्याएं थीं। इस 7 वर्षीय रोगी को क्रॉनिक इंटेस्टाइनल सूडो ऑब्सट्रक्शन का एक दुर्लभ रोग है, जिसमें गतिशीलता (मासंपेशियों के सिकुड़ने की क्षमता) कम हो जाती है और पाचन तंत्र में मांसपेशियों, नसों और हॉर्मोन के बीच तालमेल नहीं रह जाता। इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है और इससे आंतें काम करना बंद कर देती हैं।

सिंगापुर के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि लिविंग डोनर के साथ आंत के ट्रांसप्लांट की सफल सर्जरी की गई है। 2012 में निर्भया गैंगरेप और हत्या का मामला सिंगापुर के लिए संदर्भ का मामला था, क्योंकि निर्भया को उसके इलाज के लिये एयरलिफ्ट किया गया था, जहां उसने गंभीर रूप से घायल होने के कारण दम तोड़ दिया क्योंकि वह सिंगापुर में आंतों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में थी। जीवित और मृत डोनर तथा चिकित्सकीय विशेषज्ञता के अभाव में वह प्रत्यारोपण नहीं हो पाया। एक दशक के बाद, 2022 में सिंगापुर के स्वास्थ्य उद्योग में बहुत बड़ा बदलाव देखा गया, जहां भारत ने इस बदलाव को लाने में एक अहम भूमिका निभाई है। आंतों का प्रत्यारोपण जोकि उस समय प्रयोगात्मक चरण में था, ने अब 7 साल की एक बच्ची की जान बचायी है।

सिंगापुर की 7 साल की लड़की जन्म से खाने में असमर्थ थी और उसमें लगातार उल्टी होने के लक्षण थे। उसे टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (टीपीएन) पर रखा गया था जिसमें सेंट्रल वेन के माध्यम से मैक्रो और सूक्ष्म पोषक तत्वों, तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स का प्रबंधन शामिल है। उसकी तबियत बिगड़ गई और आंत प्रत्यारोपण (इंटेस्‍टाइन ट्रांसप्‍लांट) ही एकमात्र विकल्प बचा था, यह सर्जरी बेहद सफल रही। कुल 150 सेमी टर्मिनल इलियम को डोनर से लिया गया। प्राप्तकर्ता में निष्क्रिय आंत को बचाया गया था और डोनर की आंत का प्रत्यारोपण किया गया। ट्रांसप्लांट किए गए आंत ने अच्छा फैलाव और फंक्शन दिखाया। सर्जरी के बाद, पहले दिन ट्रांसप्लांट किया गया आंत सेहतमंद नजर आ रहा था।

डॉ. गौरव चौबाल, डायरेक्टर-लिवर, पैनक्रियाज, इंटेस्टाइन ट्रांसप्लांट प्रोग्राम एवं एचपीबी सर्जरी, ग्लोबल हॉस्पिटल, मुंबई, परेल का कहना है, “आंतों का प्रत्यारोपण जटिल होता है और पूरी दुनिया में बेहद दुर्लभ है। पहली बार इस तरह का ट्रांसप्लांट सिंगापुर में किया गया है। जहां तक हमारा अनुभव है, लिविंग डोनर सुरक्षित तरीके से करीब अपना 30-40% तक आंत दान कर सकते हैं। आंत के सूडो ऑब्सट्रैक्शन का पता लगने पर प्राप्तकर्ता 7 सालों तक टीपीएन पर थी। इसको लेकर सावधानीपूर्वक योजना बनायी गई, क्योंकि उसमें नर्सिग और अन्य पैरा क्लीनिकल स्टाफ के साथ प्रत्यारोपण सर्जन, गैस्ट्राइंट्रोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, न्यूट्रिनिस्ट और इंटेंसिविस्ट थे। भावी डोनर और प्राप्तकर्ता को कई सारे टेस्ट से होकर गुजरना पड़ा, ताकि अंगों की इम्युनोलॉजिकल मैचिंग हो सके। सर्जरी के बाद, पिता और बेटी स्वस्थ हो रहे हैं और जल्द ही दोनों ठीक हो जाएंगे।

यह प्रत्यारोपण सिंग हेल्थ के ट्रांसप्लांट डिविजन, ड्यूक यूनिवर्सिटी के अबडोमिनल ट्रांसप्लांट डिविजन और डॉ. गौरव चौबाल, प्रोफेसर प्रेमा राज, चेयरमैन, सिंग हेल्थ इंटेस्टाइनल ट्रांसप्लांट कमिटी के साथ-साथ डॉ. डेब्रा सुडान, अबडोमिनल सर्जरी के चीफ डिविजन के बीच साझीदारी का परिणाम है। उन्होंने डॉ. गौरव को इस ऐतिहासिक प्रत्यारोपण का हिस्सा बनने के लिये आमंत्रित किया, क्योंकि उन्होंने भारत में सबसे बड़े आंतों के प्रत्यारोपण (जीवित तथा मृत दोनों) में काम किया है।

डॉ.सुडान, डायरेक्टर, अबडोमिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी ड्यूक यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, यूएसए और आंतों के इस प्रत्यारोपण के प्रमुख सर्जन का कहना है, “इस छोटी बच्ची के लिये पैरेंट्रल न्यूट्रीशन की समस्याएं जानलेवा थीं और लंबे समय तक जीने और बेहतर जीवन जीने की एकमात्र उम्मीद आंत का प्रत्यारोपण था। शुक्र है कि उसके पिता अपनी आंत का एक हिस्सा डोनेट कर सकते थे और दोनों ही सर्जरी बहुत अच्छी रहीं। दोनों ही बहुत अच्छी तरह रिकवर हो रहे हैं और हमें इस बात की पूरी उम्मीद है कि वह इस लिविंग डोनर इंटेस्टाइन ट्रांसप्लांट के साथ वह जल्‍द ही सेहतमंद होगी।”

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