पांच दिवसीय समुद्री यात्रा करके लौटा स्वदेशी IAC विक्रांत, नेवी में होगा शामिल

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स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर (IAC) विक्रांत ने अपनी पहली पांच दिन की समुद्री यात्रा रविवार को पूरी कर ली। परीक्षण में 40 हजार टन के इस जहाज का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया। बता दें कि 23 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इस जहाज को बुधवार को समुद्री परीक्षण के लिए रवाना किया गया था और अब इसने अपने ट्रायल को सफलता के साथ पूरा कर लिया है। IAC विक्रांत को अगले साल अगस्त तक नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।

रीक्षण के सफतापूर्वक खत्म होने पर, वाइस एडमिरल एके चावला ने कहा कि यह वास्तव में “देश के लिए ऐतिहासिक क्षण” है।

वाइस एडमिरल ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा, “हम समुद्र में पांच दिनों के परीक्षण के बाद कोच्चि वापस जा रहे हैं। हम बड़ी संतुष्टि के साथ वापस जा रहे हैं। यह सब टीम वर्क के साथ संभव हुआ है।”

संतोषजनक रहा परीक्षण

नौसेना ने कहा कि परीक्षण के दौरान सिस्टम पैरामीटर संतोषजनक साबित हुए। अभ्यास के दौरान पतवार, मुख्य प्रणोदन, बिजली उत्पादन और वितरण (पीजीडी) और सहायक उपकरण सहित जहाज के प्रदर्शन का परीक्षण किया गया। दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल एके चावला ने परीक्षणों की समीक्षा की।

IAC विक्रांत से जुड़ीं खास बातें 

IAC P71 विक्रांत को करीब 23 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया किया गया है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर करीब 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है। इसकी टॉप स्पीड 52 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है। इसमें 14 फ्लोर हैं और 2300 कंपार्टमेंट हैं। इस पर 1700 नौसैनिक तैनात किए जा सकते हैं। इस जहाज पर 30 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं।

बता दें कि भारत के पास अभी सिर्फ एक विमानवाहक जहाज ‘आईएनएस विक्रमादित्य’ है। भारतीय नौसेना, हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

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