फिर गुलजार होंगे ग्रामीण बाजार : त्यौहारी सीजन में ‘ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा कारोबार की उम्मीद

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Rural Economy
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अमरेन्द्र मिश्रा
लेखक कृषक दूत समाचार पत्र के संपादक हैं. वे कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विगत तीन दशकों से लेखन कर रहे हैं

देश में कोरोना महामारी को आये छ: माह से अधिक हो गया है। इस समय समूचा विश्व कोविड-19 की प्रताडऩा से कराह रहा है। सर्वाधिक आबादी वाले भारत देश को भी कोरोना लगातार अपनी जकड़ में लेता जा रहा है। कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। रोजगार धंधा, उद्योग एवं नौकरी पेशा सभी बेचैन हैं। जब तक इस महामारी की कारगर वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक यह परेशानी बरकरार रहने की पूरी संभावना है।
80 फीसदी से अधिक ग्रामीण बाहुल्य भारत देश में ग्रामीण क्षेत्र ही अर्थव्यवस्था को सुधारने में संकटमोचक दिख रहे हैं। 70 फीसदी के लगभग देश की आबादी कृषि क्षेत्र से संबंधित हैं। इस साल देश भर में मानसूनी बारिश बेहतर होने से खरीफ फसलों का उत्पादन सर्वाधिक होने की पूरी उम्मीद है। खरीफ सीजन के अब मात्र चंद दिन बचे हैं। देश भर में खरीफ फसलों की कटाई का कार्य शुरू हो चुका है। दलहन, तिलहन पक चुकी है। धान की कटाई अक्टूबर मध्य से शुरू होने की उम्मीद है। इस वर्ष मानसूनी वर्षा का एक समान वितरण कृषि क्षेत्र के लिये सुखद है। भरपूर पानी गिरने से भूमिगत जल स्तर बढऩे के साथ ही सभी बांध, तालाब, कुयें लबालब भरे हुये हैं। पर्याप्त पानी स्टोर होने से रबी फसलों का भविष्य भी सुरक्षित हो गया है।
देश भर में एक समान बारिश होने से इस साल खरीफ सीजन में रिकार्ड 1096 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। पिछले सालों की तुलना में इस वर्ष सर्वाधिक 4 प्रतिशत बुवाई क्षेत्र बढ़ा है। इसमें सबसे अधिक 397 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई की गई है। दलहनी फसलें 137 लाख हेक्टेयर में ली गई है। तिलहन बुवाई 195 लाख हेक्टेयर में की गई है। खरीफ का मोटा अनाज 180 लाख हेक्टेयर में बोया गया है।
खरीफ सीजन में अब तक की सर्वाधिक बुवाई को देखते हुये रिकार्ड खरीफ उत्पादन का अनुमान है। इस वर्ष की एक समान वर्षा ने खरीफ फसलों के लिये संजीवनी का काम किया है। देश भर में धान, सोयाबीन, कपास, मूंगफली, मक्का, ज्वार, मूंग, उड़द इत्यादि के रिकार्ड उत्पान का अनुमान है। इस वर्ष के सर्वाधिक खरीफ उत्पादन को देखते हुये ग्रामीण क्षेत्रों से अच्छे कारोबार की उम्मीद है। कृषि आदानों विशेषकर ट्रैक्टर, उर्वरक, बीज एवं कृषि उपकरणों की मांग सबसे अधिक आने की संभावना है। इसके अलावा दो पहिया वाहन एवं चार पहिया की बिक्री भी ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक होने की उम्मीद है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में लाकडाउन के बाद भी ट्रैक्टर एवं उर्वरकों की रिकार्ड बिक्री इस बात का प्रमाण है। सरकार की विभिन्न योजनाओं से प्राप्त धनराशि एवं गेहूं, चना इत्यादि के भरपूर उत्पादन के कारण किसानों के पास नकदी का प्रवाह बढ़ा है। किसानों ने इन पैसों का पूरा उपयोग कृषि आदानों के क्रय करने में किया है। अगले महीने से देश भर में त्यौहारों को देखते हुये विभिन्न कृषि आदान कंपनियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है।
अक्टूबर से शुरू हो रहे नवरात्रि उत्सव के साथ नवंबर अंत तक ग्रामीण क्षेत्रों में उमंग एवं उत्साह का वातावरण रहेगा। इस दौरान खरीफ फसलों की राशि किसानों के पास आ चुकी होगी। रबी फसलों की बुवाई का भी यही समय उपयुक्त होगा। कहने का तात्पर्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय की दृष्टि से अक्टूबर एवं नवम्बर का महीना बेहतरीन होगा। एक बार फिर से ग्रामीण बाजारों में रौनक लौटने की पूरी उम्मीद है।
मप्र राज्य का सराहनीय योगदान
देश का हृदय स्थल मध्यप्रदेश इस समय कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले छ: वर्षों से सर्वोच्च कृषि उत्पादन का कृषि कर्मण पुरस्कार हासिल कर रहा प्रदेश कृषि उत्पादन में निरंतर कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस साल मध्यप्रदेश ने 3 करोड़ टन गेहूं उत्पादन करके पंजाब को पीछे छोड़ नंबर वन गेहूं उत्पादक राज्य बन गया है। देश का 60 प्रतिशत सोयाबीन पैदा करने वाले मध्यप्रदेश में चालू खरीफ सीजन में 58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन बोया गया है। 30 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई कर चुका प्रदेश तेजी से धान उत्पादन में भी आगे बढ़ रहा है। चालू खरीफ सीजन में 145 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। कोरोना संक्रमण के दौरान भी प्रदेश में 30 फीसदी ज्यादा ट्रैक्टर बिक्री इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्र आर्थिक रूप से सक्षम हो रहे हैं। किसानों की क्रय शक्ति निरंतर बढ़ रही है। बीज प्रतिस्थापन दर, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं आधुनिक खेती का प्रसार इस बात का प्रमाण है। इस बात में कोई शक नहीं कि देश की अर्थव्यस्था को संभालने में ग्रामीण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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