भारत में पहला फंक्शनल और बॉयो रेगुलेटरी मेडिसन सेंटर लांच

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  • डॉ.आनंद बर्मन ( डाबर ग्रुप) और उनके ऑफिस, डॉ. आलोक चोपड़ा    संजय सचदेवा के साथ मिलकर बने देवम वैलनेस ने एक ऐसा फंक्शनल और बॉयोलोजिकल मेडिसन सेंटर लांच किया है, जिसमें जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के न सिर्फ लक्षणों का इलाज होगा बल्कि उसकी जड़ से पहचान करके बीमारी को खत्म करके लोगों को सेहतमंद बनाने का प्रयास किया जाएगा।
  • देवम वैज्ञानिक आधारित प्राकृतिक और आधुनिक दवाईयों के संयोजन से लोगों के शरीर और मन को स्वस्थ रखने के सिद्धांत पर काम करता है।

26 नवंबर 2019, गुरूग्राम/नई दिल्ली- सेहत, स्वास्थ्य जागरूकता और बेहतरी के लिए काम कर रही देवम वैलनेस अब अपने इसी सिद्धांत को अपनाते हुए फंक्शनल और बॉयोरेगुलेटरी मेडिसन सेंटर लांच कर रहा है। इसमें कई तरह की गंभीर बीमारियों का इलाज पुराने व आधुनिक दृष्टिकोण को मद्देनज़र रखते हुए किया जाएगा। सेंटर में इलाज का तरीका कुछ ऐसा होगा कि जीवनशैली में बेहतरीन बदलाव करके भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचा जा सके, ताकि लोग सेहतमंद जीवन बिता सकें। स्वस्थ जीवन से खुशी और सकारात्मकता को बढ़ावा मिलता है।

देवम वैलनेस सेंटर में बीमारियों का  इलाज भी ‘देवम तरीके’ से ही किया जाएगा। इसमें न सिर्फ बीमारी के लक्षणों का इलाज होगा बल्कि मन व शरीर को असंतुलित करने वाले कारकों की जड़ तक पहचान करके उसे ठीक किया जाएगा। देवम वैज्ञानिक आधार को ध्यान रखते हुए लंबे समय की पद्धति अपनाता है, जिससे लोगों  का पूरा जीवन सेहतमंद सुनिश्चित हो सके।

सेंटर के लांच पर देवम वैलनेस के संस्थापक व मेडिकल डॉयरेक्टर डॉ. आलोक चोपड़ा ने कहा, देवम में हम वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार बॉयलोजी मेडिसन दृष्टिकोण अपनाकर व्यक्ति की न सिर्फ बीमारी बल्कि ये भी जानते है कि उनका जेनेटिक व्यवहार कैसे लाइफस्टाइल, पोषण, पर्यावरण और मानसिक शक्तियों को नियंत्रित करता है। हमने नया जीपीएस तैयार किया है, जो गंभीर बीमारियों का नया रोडमैप तैयार करेंगा। हमारा मकसद शरीर प्राकृतिक तरीके से काम करें, जिससे हमारे फंक्शनल और बॉयो रेगुलेटरी सिस्टम का निर्माण हो सकें ताकि हमारा शरीर खुद ही सभी तरह की परेशानियों या बीमारियों से निपट सके।

डॉ. आलोक ने तकनीक के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि नौ बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें पोषक प्लान्स जेनेटिक, एपिजेनेटिक,रूग्णता और रोगी की उम्र पर आधारित होते हैं। इसमें रोगी के पाचनतंत्र को संतुलित करने के लिए आंत के माइक्रोबोस में संतुलन बनाया जाता है, सूजन कम की जाती है, इंफ्रा रेड सोनाज़, हाइपरबैरिक ऑक्सीजन और ओज़ोन थेरेपी जैसी तकनीकों की मदद से डिटोक्सिफिकेशन किया जाता है। शरीर की मेटाबॉलिकप्रक्रिया में सुधार, शरीर के हार्मोंनल संतुलन बनाया जाता है। रोगी के बैठने, सोने और पोस्चर्स का विश्लेषण करना, मानसिक शक्ति बनाना और एपिजेनिटक बदलाव लाकर जींस के व्यवहार में बदलाव लाना है।

देवम में 30 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ है, जो दुनिया के लगभग 14 देशों में प्रेक्टिस और बॉयोलोजिकल रिसर्च कर रहे हैं और उन सभी का मेडिकल रिसर्च में कुल मिलाकर 900 से ज़्यादा साल का अनुभव है और यही देवम की सबसे बड़ी संपति है।

शरीर खुद ही बीमारी को ठीक करने वाली प्रक्रिया के बारे में देवम वैलनेस के संस्थापक व सीईओ संजय सचदेवा कहते हैं, विभिन्न टेस्ट के माध्यम से देवम व्यक्ति के सेहत और सभी तरह के महत्वपूर्ण डेटा का विश्लेषण करता है। इसके बाद ही इलाज का सुझाव दिया जाता है। व्यक्ति की सेहत की प्रगति को अनुभवी डॉक्टरों, पुरस्कृत सोफ्टवेयर इलाज और प्रशिक्षित वैलनेस कोच द्वारा लगातार मॉनिटर किया जाता है। समय के साथ वे लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिए सशक्त महसूस करते हैं।

देवम वैलनेस में दिल से जुड़ी बीमारियों, आंत की समस्याएं, हार्मोंनल असंतुलन, यौन रोग, कैंसर, ऑटोइम्यून बीमारियां, मोटापा, डिप्रेशन, चिंता और अन्य कई तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है।

देवम वैलनेस के लांच पर बात करते हुए डॉबर ग्रुप के चेयरमैन इमरिटस डॉ. आनंद बर्मन ने कहा, शरीर को ठीक करने के लिए पारम्परिक दवाइयों की शक्ति पर काम करना हमारा लक्ष्य रहा है। देवम के साथ पार्टनरशिप करके हम एक कदम आगे जा रहे हैं, जिसमें वैज्ञानिक आधारित, प्रकृतिसे जुड़ी थेरेपी और इलाज पर काम किया जाएंगा। आजकल लोग अपनी सेहत और जीवनशैली को लेकर काफी जागरूक हो गए है और निश्चित तौर पर हमारा ये कदम उन्हें आगे लेकर जाएगा। भविष्य में हम अलग अलग क्षेत्रों में इसके सेंटर्स का विस्तार करेंगे।

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