मौद्रिक नीति रूपरेखा की समीक्षा कर रहा RBI: आर.बी.आई. गवर्नर

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आर.बी.आई. गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि इस बारे में सरकार समेत संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श की योजना है। सरकार ने मुद्रास्फीति को निश्चित सीमा के दायरे में रखने के प्रयास के तहत साल 2016 में आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति गठित करने का फैसला किया। समिति को नीतिगत दर (रेपो दर) निर्धारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति को 2 फीसदी घट-बढ़ के साथ महंगाई दर को 4 फीसदी पर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस संदर्भ में दास ने कहा है कि, ‘मौद्रिक नीति रूरपेखा साढे तीन साल से काम कर रहा है। हमने आंतरिक समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है कि आखिर मौद्रिक नीति रूपरेखा ने किस तरीके से काम किया। हमने आंतरिक रूप से मौद्रिक नीति रूपरेखा के प्रभाव की समीक्षा शुरू की है। चालू वर्ष के मध्य में जून के आसपास हम सभी विश्लेषकों और विशेषज्ञों तथा संबद्ध पक्षों के साथ बैठक करेंगे। इस बारे में सरकार की भी सलाह ली जाएगी।’ 
आगे उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से आरबीआई को सरकार से बातचीत करनी है क्योंकि रूपरेखा कानून का हिस्सा है। मौद्रिक नीति का लाभ ग्राहकों को मिलने के संदर्भ में गवर्नर ने कहा कि इसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और आने वाले समय में यह और बेहतर होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में सुधार आया है। दिसंबर एमपीसी में नए कर्ज में 0.49 फीसदी का लाभ ग्राहकों को दिया गया जबकि फरवरी में यह बढ़कर 0.69 फीसदी हो गया है। यानी इसमें सुधार आया है।
‘बता दें कि आरबीआई ने छह फरवरी 2020 को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार दूसरी बार नीतिगत दर रेपो को 5.15 फीसदी पर बरकरार रखा। दिसंबर में नीतिगत दर को यथावत रखने से पहले लगातार पांच बार नीतिगत दर में कटौती की गई। इसमें कुल 1.35 फीसदी की कटौती की गई। 

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