सुरक्षित व सतत कृषि के लिए नीतियों व एक्शन प्लान पर रिपोर्ट

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10 अक्टूबर, 2019 नई दिल्ली- सुरक्षित व सतत कृषि के लिए नीतियों व एक्शन प्लान’ पर पद्म भूषण डॉ. आर. एस. पड़ोदा की चेयरमैनशिप में गठित समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानित सलाहकार, प्रो. के. विजय राघवन को हाल ही में प्रस्तुत की गई। समिति का मैंडेट छोटे भूमिधारक किसानों की बेहतर आजीविका के लिए सतत कृषि प्राप्त करने के लिए पॉलिसी का पुर्ननिर्माण एवं चुस्त कार्ययोजना का परामर्श देना तथा गरीबी, भूख व कुपोषण की समस्याओं को संबोधित करना है, जो पिछले कुछ दशकों में कृषि में हुई विविध क्रांतियों (हरित, ब्लू, श्वेत आदि) के बावजूद भारत में मौजूद हैं।
इस रिपोर्ट में प्रदर्शित किया गया कि सभी हितधारकों के समावेशन के साथ पॉलिसी के सकारात्मक वातावरण द्वारा नई टेक्नॉलॉजी एवं इनोवेशंस को अपनाने व स्केल करने से कृषि में वृद्धि हो सकती है। इसमें एक स्पष्ट रणनीति एवं रोडमैप के बारे में बताया गया, जिससे भारत को सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) के एजेंडा के अनुसार प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए सतत, इनोवेटिव एवं लाभदायक कृषि दृष्टिकोण प्राप्त करने और गरीबी, भूख व कुपोषण को कम करने में मदद मिले।
इस रिपोर्ट में कुछ परिवर्तनकारी सुझाव दिए गए, जिनमें पॉलिसी, इंस्टीट्यूशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, मार्केट, साईंस, टेक्नॉलॉजी एवं इनोवेशंस शामिल हैं, तथा ये मिलकर देश के कृषि के आउटपुट एवं जीडीपी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान देते हैं। इस रिपोर्ट में किसानों को केंद्र में रखा गया है तथा ऐसे संशोधनों का सुझाव दिया गया है, तो संकट का समाधान कर उनकी आय व जीवन स्तर में सुधार करे।
सुझाव में बताए कुछ संस्थागत संशोधनों में शामिल हैं: चुनौतियों का समाधान करने के लिए वर्तमान कृषि नीतियों की समीक्षा एवं कृषि के विकास तथा किसानों के कल्याण के लिए नई नीति का गठन; जारी मिशन/राष्ट्रीय कार्यक्रम, कुछ नए मिशन प्रारंभ करने की आकस्मिक जरूरत, शोध के लिए वर्तमान पब्लिक फंडिंग को दोगुना करने की आकस्मिकता के साथ आईसीएआर/एसएयू/केवीके/पीआरआई मजबूत करना; प्रधानमंत्री की चेयरमैनशिप के अंतर्गत नई नेशनल एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट एंड फार्मर्स वैलफेयर काउंसिल (एनएडीएंडएफडब्लूसी) की स्थापना शामिल है, ताकि राज्य के विषय के रूप में कृषि के लिए आवश्यक सामंजस्य स्थापित हो; केंद्र व राज्यों में फार्मर्स वैलफेयर कमीशन स्थापित हो; एक स्वतंत्र सामरिक योजना, मॉनिटरिंग एवं इवैल्युएशन यूनिट स्थापित हो; केवीके के मैंडेट का विस्तार ‘नॉलेज-स्किल-इनोवेशन सेंटर्स’ के रूप में हो तथा एग्री-क्लिनिक्स की स्थापना हो एवं महिलाओं व युवाओं को प्रोत्साहित कर उनका सशक्तीकरण हो, ताकि वो कृषि कार्य में संलग्न रहते हुए महत्वपूर्ण गेमचेंजर की भूमिका निभा सकें।
रिपोर्ट में कृषि में पूंजी निवेश (पब्लिक एवं प्राईवेट) बढ़ाने के लिए जरूरी पॉलिसी संशोधन; कम ब्याज दर पर किसानों व युवा उद्यमियों को क्रेडिट (4 प्रतिशत) की उपलब्धता बढ़ाना, ज्यादा वित्तीय संस्थानों जैसे किसान बैंक्स का निर्माण, समर्पित वेयरहाउसेस का प्रावधान, कस्टम हायर आधार पर खेती की मशीनरी की उपलब्धता आदि शामिल हैं।
समिति का परामर्श है कि डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मैकेनिज़्म द्वारा अच्छे कृषि अभ्यासों के लिए इंसेंटिव के रूप में कृषि में सब्सिडी दी जानी चाहिए। यह परामर्श दिया गया कि खेती की एफिशियंसी एवं पर्यावरण सेवाओं के लिए इंसेंटिव के रूप में वर्तमान सब्सिडी को प्रति कृषि परिवार 10000 रु. प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से अधिकतम 10 एकड़ तक दिया जाना चाहिए।
इसमें यह सुझाव भी दिया गया कि किसानों को सी2 लागत से 1.5 गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जाना चाहिए तथा प्रोक्योरमेंट को सभी महत्वपूर्ण कृषि मदों तक विस्तृत किया जाना चाहिए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार की उपलब्धता बढ़ाना तथा ई-एनएएम द्वारा बाजार के लिंकेज सुनिश्चित करने की जरूरत है, तथा विभिन्न राज्यों द्वारा एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एवं लाईवस्टॉक मार्केटिंग (एपीएलएम) एक्ट एवं कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट को एकसमान रूप से अपनाया जाए। इसके अलावा मंडी टैक्स को भी 5 से 7 प्रतिशत तक लाना चाहिए। यदि हम ई-एनएएम एवं ग्लोबल निर्यात के लिए एक राष्ट्रीय बाजार चाहते हैं, तो एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट (ईसीए) एवं एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी (एपीएमसी) एक्ट की भी वर्तमान संदर्भ में उनकी संबद्धता के लिए समीक्षा की जानी चाहिए। बायलॉजिकल डाईवर्सिटी एक्ट एवं प्लांट वैरायटीज़ एंड फार्मर्स राईट्स एक्ट (पीवीपीएंडएफआरए) के क्रियान्वयन के संदर्भ में बीज उद्योग की समस्याएं, जेनेटिक संसाधनों के उपयोग के लिए एक्सेस एंड बेनेफिट शेयरिंग (एबीएस) से संबंधित अनसुलझी समस्याएं, जेनेटिक मोडिफिकेशन (जीएम) जैसे इनोवेशन पर इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) प्रोटेक्शन, जेनोम एडिटिंग आदि, बीजों पर कीमत निर्धारण की नीति, तथा सीड एक्ट में लंबे समय से अपेक्षित पुर्नमूल्यांकन का समाधान प्राथमिकता से किए जाने की जरूरत है। युवाओं (महिलाओं सहित) की टेक्नॉलॉजी/एक्सटेंशन एजेंट्स के रूप में सक्रिय संलग्नता, इनपुट एवं/या सर्विस प्रदाता तथा युवा उद्यमियों सहित एग्री क्लिनिक्स की स्थापना के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी को टेक्नॉलॉजी के प्रभावशाली विस्तार से जोड़ना होगा। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट (एक्ज़िम) पॉलिसी को दीर्घकालिक एवं पूर्वानुमान उन्मुख दृष्टिकोण के आधार पर बनाना होगा, जिसके लिए एपीईडीए को मजबूत करने की आवश्यकता है।
कृषि एवं ग्रामीण विकास से संबंधित सीड बिल, पेस्टिसाईड मैनेजमेंट बिल, बायोटेक्नॉलॉजी रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (बीआरएआई) बिल, एवं अन्य महत्वपूर्ण बिल/एक्ट को संसद द्वारा प्राथमिकता से पारित करना होगा। बायोटेक्नॉलॉजी, लाईवस्टॉक ब्रीडिंग, लैंड यूटिलाईज़ेशन पर राष्ट्रीय नीति के अनुसार तीव्र निर्णय लिया जाए तथा सभी संबंधित राज्य इसे तीव्रता से लागू करें। समिति का सुझाव है कि यदि सरकार द्वारा रिपोर्ट में बताए गए सुझावों को पूरी प्रतिबद्धता से मिशनरी उत्साह के साथ लागू किया जाए, तो   कृषि सेक्टर की प्रगति को गति देकर एसडीजी ज्यादा तेजी से हासिल किए जा सकते हैं।

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